
कोरबा-चाम्पा मार्ग बना मौत का जाल, शासन-प्रशासन कब जागेगा?
कोरबा(छत्तीसगढ़ टाइम्स 24×7) ऊर्जा नगरी कोरबा का कोरबा-चाम्पा मुख्य मार्ग आज खतरनाक हालात में है। इम्लिडुग्गु गौ माता चौक के पास सड़क की जर्जर स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि रोजाना हजारों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर इस रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं। सवाल यह है कि आखिर शासन-प्रशासन कब जागेगा?


सालों से बंद पड़ी मानिकपुर खदान के समीप अन्य खदानों से रोजाना राखड़ डम्प होती है। बड़े-बड़े हाइवा ट्रकों की लगातार आवाजाही ने इस सड़क को टुकड़ों-टुकड़ों में बाँट दिया है। बरसात आते ही गड्ढे तालाब में बदल जाते हैं, और धूप निकलते ही धूल का गुबार हवा में ज़हर घोल देता है।
🚨 सवाल यही है – क्या कोरबा शहर को गड्ढों में डूबोकर ही विकास गिनाया जाएगा?
🚨 क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है, ताकि उसके बाद ही सुध लिया जाए?
🚨 स्कूल बसों में बैठे मासूम बच्चों की जान खतरे में डालना किसकी ज़िम्मेदारी है?
🚨 एम्बुलेंस और आपातकालीन सेवाएँ जब इस सड़क पर जाम और गड्ढों में फँसती हैं, तब जिम्मेदार अफसर कहाँ होते हैं?
स्थानीय लोगों का कहना है कि कोरबा की सड़कों में गड्ढे नहीं हैं, बल्कि अब पूरा शहर ही गड्ढों में तब्दील हो गया है। फिर भी प्रशासन की चुप्पी समझ से परे है।
अगर अब भी शासन-प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लेकर सड़क सुधार कार्य शुरू नहीं किया, तो आने वाले दिनों में यह मार्ग किसी बड़े हादसे का कारण बनेगा। और तब जनता का यही सवाल होगा—
👉 “क्या हमारी जान इतनी सस्ती है कि सड़क सुधारने के लिए मौत का सबूत चाहिए?”

Cheaf Editor of Chhattisgarhtimes 24×7




