
सरगबुंदिया हाट बाजार में जान जोखिम में, हाईवे पार कर खरीदारी को मजबूर ग्रामीण
सड़क के दोनों ओर सजता है सोमवार का बाजार, तेज रफ्तार भारी वाहनों के बीच कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
सरगबुंदिया(छत्तीसगढ़ टाइम्स 24×7)कोरबा–चांपा मुख्य मार्ग पर स्थित सरगबुंदिया गांव का साप्ताहिक हाट बाजार इन दिनों व्यवस्था की बदहाली और सुरक्षा की अनदेखी का बड़ा उदाहरण बन गया है। हर सोमवार लगने वाले इस बाजार में आसपास के कई गांवों से सैकड़ों ग्रामीण अपने परिवार के साथ खरीदारी करने पहुंचते हैं। लेकिन बाजार की मौजूदा व्यवस्था ग्रामीणों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
बताया जाता है कि नेशनल हाईवे का निर्माण होने और सड़क के राष्ट्रीय राजमार्ग में तब्दील होने से पहले से ही सरगबुंदिया चौक पर यह साप्ताहिक बाजार लगता आ रहा है। पहले सड़क की स्थिति और यातायात का स्वरूप अलग था, लेकिन अब यही मार्ग नेशनल हाईवे-149B का हिस्सा है और इस पर भारी वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है।
हाईवे के दोनों ओर बाजार, बीच में दौड़ते भारी वाहन
सोमवार को लगने वाले हाट बाजार में सड़क के दोनों ओर दुकानें सजती हैं। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग बाजार पहुंचते हैं। ऐसे में खरीदारी करने वाले ग्रामीणों को बाजार के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक जाने के लिए नेशनल हाईवे-149B को पार करना पड़ता है।
यही स्थिति सबसे बड़ा खतरा बन रही है।
एक तरफ बाजार में परिवार के साथ पहुंचे ग्रामीण और दूसरी तरफ हाईवे पर दौड़ते ट्रक व बड़े वाहन। भारी वाहनों की रफ्तार का कोई भरोसा नहीं। ऐसे में सड़क पार करते समय जरा सी चूक किसी परिवार की खुशियों को मातम में बदल सकती है।
क्या किसी हादसे के बाद जागेंगे जिम्मेदार?
सवाल यह है कि जब बाजार में हर सोमवार सैकड़ों ग्रामीण पहुंचते हैं और हाईवे के दोनों ओर दुकानें लगती हैं, तो ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
क्या जिम्मेदार लोगों को किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
क्या बाजार के लिए सुरक्षित स्थान, बैरिकेडिंग, यातायात नियंत्रण या अन्य सुरक्षा व्यवस्था नहीं की जा सकती?
सबसे बड़ा सवाल स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नेताओं से भी है। जिन ग्रामीणों के वोट से प्रतिनिधि चुने जाते हैं, उन्हीं ग्रामीणों की सुरक्षा से जुड़ा यह गंभीर मुद्दा आखिर उनकी नजरों से कैसे ओझल है?
आंखों पर पट्टी कब खुलेगी, आवाज कब उठेगी? 
सरगबुंदिया का हाट बाजार कोई नया बाजार नहीं है। वर्षों से ग्रामीण यहां खरीदारी करने पहुंचते रहे हैं। लेकिन हाईवे बनने के बाद यातायात का दबाव और भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ी है। ऐसे में पुरानी व्यवस्था को उसी रूप में चलाना खतरे को नजरअंदाज करने जैसा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाजार के दिन कम से कम यातायात व्यवस्था, सड़क पार करने के लिए सुरक्षित स्थान और भारी वाहनों की गति नियंत्रित करने जैसी व्यवस्था होनी चाहिए।

लेकिन सवाल यह है कि जिम्मेदार कब जागेंगे?
क्या जनप्रतिनिधियों की आंखों पर बंधी पट्टी किसी हादसे के बाद खुलेगी?
क्या जिम्मेदारों के मुंह से आम लोगों की सुरक्षा के लिए आवाज किसी घटना के बाद निकलेगी?
या फिर सरगबुंदिया हाट बाजार की यह अव्यवस्था यूं ही चलती रहेगी?
ग्रामीणों की मांग—बाजार नहीं, व्यवस्था बदलिए
ग्रामीणों को बाजार बंद नहीं चाहिए, उन्हें चाहिए सुरक्षित बाजार और सुरक्षित रास्ता।
क्योंकि हादसा होने के बाद कार्रवाई करने से बेहतर है—हादसा होने से पहले व्यवस्था सुधार दी जाए।
सरगबुंदिया के ग्रामीण अब सवाल पूछ रहे हैं—
आखिर उनकी जान की कीमत समझने के लिए जिम्मेदारों को और कितना इंतजार चाहिए?

Cheaf Editor of Chhattisgarhtimes 24×7




