
हाईकोर्ट की अपडेटेड रिपोर्ट: सांसद-विधायकों से जुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई जारी, कई प्रकरणों में अगस्त-सितंबर की तारीख तय
बिलासपुर/रायपुर(छत्तीसगढ़ टाइम्स 24×7) छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जुलाई 2026 तक लंबित सांसदों और विधायकों से जुड़े आपराधिक मामलों की अपडेटेड स्टेटस रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में प्रदेश के विभिन्न जिलों की निचली अदालतों में लंबित प्रकरणों की स्थिति, संबंधित धाराएं, सुनवाई की तारीख और अब तक हुई न्यायिक कार्रवाई का ब्यौरा दर्ज किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार बिलासपुर, बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा, कबीरधाम, रायपुर और राजनांदगांव की अदालतों में सांसदों और विधायकों से जुड़े कई आपराधिक मामले लंबित हैं।
अटल श्रीवास्तव के खिलाफ मामला
बिलासपुर में कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में क्रिमिनल केस नंबर 541/2026 लंबित है। मामले में बीएनएस की धारा 190, 191(2), 192 और 126(2) के तहत प्रकरण दर्ज है। रिपोर्ट के मुताबिक मामले में साक्ष्य के लिए 20 अगस्त 2026 की तारीख निर्धारित की गई थी।
वहीं बलौदाबाजार में पूर्व विधायक प्रमोद शर्मा के खिलाफ भी आपराधिक प्रकरण न्यायालय में लंबित है।
रायपुर में कई मामले लंबित
राजधानी रायपुर में पूर्व और वर्तमान विधायकों से जुड़े कई मामले अलग-अलग अदालतों में चल रहे हैं। इनमें एसीबी स्पेशल कोर्ट, मनी लॉन्ड्रिंग कोर्ट और सीजेएम कोर्ट में लंबित प्रकरण शामिल हैं।
रिपोर्ट में कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय, कांग्रेस विधायक कावासी लखमा सहित अन्य नेताओं से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया गया है। कुछ प्रकरणों में अगस्त और सितंबर 2026 में सुनवाई की तारीखें निर्धारित हैं।
राजनांदगांव के छह मामलों का भी उल्लेख
राजनांदगांव से जुड़े मामलों में पूर्व भाजपा सांसद मधुसूदन यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ सीजीपीडीआई एक्ट और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज छह मामलों का उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है।
इनमें कुछ मामलों में हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के आधार पर कार्यवाही स्थगित है, जबकि अन्य प्रकरणों में आरोपियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए न्यायालयीन प्रक्रिया जारी है।
हाईकोर्ट की निगरानी में मामलों की स्थिति
हाईकोर्ट की ओर से जारी अपडेटेड स्टेटस रिपोर्ट का उद्देश्य सांसदों और विधायकों से जुड़े लंबित आपराधिक मामलों की न्यायालयवार स्थिति को सामने रखना है। रिपोर्ट में संबंधित मामलों की वर्तमान स्थिति, अगली सुनवाई की तारीख और न्यायालय द्वारा की जा रही कार्रवाई का विवरण दर्ज है।
हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित होना अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा।

Cheaf Editor of Chhattisgarhtimes 24×7




