
पंडवानी की अमर आवाज़ तीजन बाई नहीं रहीं, छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को अपूरणीय क्षति
छत्तीसगढ़ टाइम्स 24×7 रायपुर कोरबा
पद्मविभूषण से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन से छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश की लोक कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उन्होंने अपने अद्वितीय गायन, अभिनय और कापालिक शैली की पंडवानी प्रस्तुति से महाभारत की कथाओं को विश्वभर में नई पहचान दिलाई। उनके निधन से भारतीय लोक संस्कृति ने अपनी एक अमूल्य धरोहर खो दी।
प्रमुख उपलब्धियाँ:
जन्म: 24 अप्रैल 1956, गनियारी (वर्तमान दुर्ग/भिलाई क्षेत्र), छत्तीसगढ़।
पंडवानी की कापालिक शैली को नई पहचान दिलाने वाली पहली प्रमुख महिला कलाकार।
भारत सहित अनेक देशों में पंडवानी की प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को वैश्विक मंच तक पहुँचाया।
पद्मश्री (1988)
संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1995)
पद्मभूषण (2003)
पद्मविभूषण (2019)
विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा मानद डी.लिट. की उपाधि से सम्मानित।

Cheaf Editor of Chhattisgarhtimes 24×7




