
डॉ. राजेंद्र प्रसाद: सादगी, सेवा और समर्पण की मिसाल
छत्तीसगढ़ टाइम्स 24×7 कोरबा रायपुर
आज भारत के प्रथम राष्ट्रपति की पुण्यतिथि है। यह दिन हमें न केवल उनके योगदान को याद करने का अवसर देता है, बल्कि उनकी सादगीपूर्ण जीवनशैली से प्रेरणा लेने का भी संदेश देता है। वे ऐसे महान नेता थे जिन्होंने ऊँचे पद पर रहते हुए भी विनम्रता और सादगी को कभी नहीं छोड़ा।
सादगी भरा जीवन, ऊँचे आदर्श
डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जीवन इस बात का प्रमाण है कि महानता पद या प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि विचारों और कर्मों से तय होती है। राष्ट्रपति बनने के बाद भी उन्होंने अपने जीवन में विलासिता को स्थान नहीं दिया। वे सामान्य भोजन करते, सरल वस्त्र पहनते और आम लोगों से सीधे जुड़कर उनकी समस्याएँ सुनते थे।
उनकी यही सादगी उन्हें जनता के और करीब ले आई। वे मानते थे कि सच्चा नेतृत्व वही है जो जनता के सुख-दुख को अपना समझे।
शिक्षा और राष्ट्रसेवा का अद्भुत संगम
बिहार के एक साधारण परिवार में जन्मे डॉ. राजेंद्र प्रसाद बचपन से ही मेधावी छात्र थे। उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त कर वकालत में सफलता हासिल की, लेकिन देश की आजादी के लिए सब कुछ त्याग दिया। महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई और जेल यात्राएँ भी कीं।
स्वतंत्रता के बाद उन्हें भारत का प्रथम राष्ट्रपति बनने का गौरव प्राप्त हुआ। उन्होंने संविधान के मूल्यों की रक्षा करते हुए देश को लोकतांत्रिक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पद पर रहते हुए भी बने रहे ‘जन-राष्ट्रपति’
राष्ट्रपति बनने के बाद भी वे स्वयं को जनता का सेवक मानते थे। कहा जाता है कि वे अपने वेतन का बड़ा हिस्सा जरूरतमंदों की सहायता में लगा देते थे। उनका मानना था कि सत्ता सेवा का माध्यम है, अहंकार का नहीं।
उनका व्यक्तित्व यह सिखाता है कि बड़ा पद मिलने पर भी व्यक्ति को अपने मूल संस्कार नहीं भूलने चाहिए।
उनसे क्या सीखें?
डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जीवन आज के युवाओं के लिए एक प्रेरणा है।
- सादगी में भी महानता संभव है।
- शिक्षा का उद्देश्य केवल सफलता नहीं, समाज सेवा होना चाहिए।
- बड़े पद पर पहुँचकर भी विनम्र बने रहना ही सच्ची उपलब्धि है।
- राष्ट्रहित को हमेशा व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर रखना चाहिए।
आज भी प्रासंगिक हैं उनके विचार
आज के समय में जब भौतिकता और प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है, तब डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जीवन हमें संतुलन, नैतिकता और सेवा का मार्ग दिखाता है। उनकी पुण्यतिथि हमें याद दिलाती है कि सच्चा नेतृत्व वही है जो त्याग, ईमानदारी और समर्पण पर आधारित हो।
भारत के इस महान सपूत को विनम्र श्रद्धांजलि। उनके आदर्श आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करते रहेंगे।

Cheaf Editor of Chhattisgarhtimes 24×7




